कर्ज के बोझ तले दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) के लिए नया साल 2026 उम्मीदों के साथ-साथ नई चुनौतियां भी लेकर आया है। कंपनी अभी अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने और 5G रोलआउट की योजना पर काम कर ही रही थी कि अहमदाबाद GST कमिश्नर कार्यालय से आए एक बड़े झटके ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 637.90 करोड़ रुपये की भारी-भरकम पेनल्टी के इस आदेश ने कंपनी के रिकवरी प्लान पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
637 करोड़ का टैक्स डिमांड: क्या है पूरा मामला?
वोडाफोन आइडिया ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी (BSE फाइलिंग) में बताया कि उसे 31 दिसंबर, 2025 को अहमदाबाद के सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (CGST) कार्यालय से एक आदेश प्राप्त हुआ है। यह आदेश CGST एक्ट, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है।
इस आदेश के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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कुल डिमांड: 6,37,90,68,254 रुपये (लगभग 638 करोड़ रुपये)।
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अवधि: यह पेनल्टी वित्त वर्ष 2021–22 से संबंधित है।
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आरोप: कंपनी पर आरोप है कि उसने उस दौरान टैक्स का कम भुगतान किया और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का वास्तविकता से अधिक दावा किया।
कंपनी का रुख: कानूनी लड़ाई की तैयारी
वोडाफोन आइडिया ने स्पष्ट किया है कि वह इस टैक्स डिमांड और पेनल्टी से सहमत नहीं है। कंपनी का मानना है कि उसने नियमों का पालन किया है और वह इस आदेश के खिलाफ अपील करने और कानूनी विकल्पों का सहारा लेने की योजना बना रही है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया लंबी चल सकती है, जिससे कंपनी के कैश फ्लो पर अनिश्चितता के बादल मंडरा सकते हैं।
शेयर बाजार में विरोधाभास: पेनल्टी के बावजूद उछाल
दिलचस्प बात यह है कि जब 1 जनवरी को बाजार बंद हुआ, तो वोडाफोन आइडिया के शेयरों में सकारात्मक रुख देखा गया। टैक्स नोटिस की खबर आने के बावजूद शेयर 8% की बढ़त के साथ 11.62 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के मार्केट कैप वाली इस कंपनी के लिए यह उछाल निवेशकों की ओर से एक उम्मीद की किरण जैसा था।
परंतु, शुक्रवार यानी 2 जनवरी 2026 को बाजार की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या निवेशक इस पेनल्टी की खबर को पचा पाते हैं। आमतौर पर इतने बड़े टैक्स डिमांड के बाद शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा जाता है, विशेषकर ऐसी कंपनी के लिए जो पहले से ही एजीआर (AGR) बकाया और कर्ज के संकट से जूझ रही हो।
निवेशकों के लिए आगे की राह
वोडाफोन आइडिया के सामने वर्तमान में तीन मुख्य मोर्चे हैं:
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सरकारी बकाया: कंपनी को एजीआर और स्पेक्ट्रम बकाया के भुगतान के लिए फंड जुटाने की सख्त जरूरत है।
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नेटवर्क विस्तार: एयरटेल और जियो से मुकाबला करने के लिए 5G सेवाओं का विस्तार अनिवार्य है।
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कानूनी विवाद: नए टैक्स नोटिस कंपनी की बैलेंस शीट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वोडाफोन आइडिया के शेयर में अभी काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) बना रहेगा। जब तक कंपनी फंड जुटाने (Fundraising) की प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेती, तब तक छोटे निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।