नयी दिल्ली: देश के बैंकिंग क्षेत्र में कार्य संस्कृति को आधुनिक बनाने और पर्यावरण स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने केंद्र सरकार से एक बार फिर 'पांच दिवसीय कार्य सप्ताह' (5-Day Week) लागू करने की पुरजोर मांग की है। बुधवार, 13 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक विस्तृत पत्र में परिसंघ ने तर्क दिया है कि यह कदम न केवल कर्मचारियों के कल्याण के लिए, बल्कि ऊर्जा बचत के राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए भी अनिवार्य है।
ऊर्जा बचत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी
AIBOC के महासचिव रूपम रॉय ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग सेवाओं में 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम) का विकल्प सीमित है, इसलिए कार्य दिवसों में कटौती ही ऊर्जा संरक्षण का सबसे प्रभावी तरीका है।
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पर्यावरणीय लाभ: संगठन का दावा है कि सप्ताह में दो दिन बैंक शाखाएं बंद रहने से बिजली की खपत, शाखा अवसंरचना पर परिचालन भार और परिवहन के लिए उपयोग होने वाले पेट्रोल-डीजल की भारी बचत होगी। इससे बैंकिंग क्षेत्र के कुल 'कार्बन उत्सर्जन' में भी उल्लेखनीय गिरावट आएगी।
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सड़क पर दबाव: कर्मचारियों और ग्राहकों के आवागमन में कमी आने से शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या में भी सुधार होगा।
डिजिटल बैंकिंग: बदलता स्वरूप
परिसंघ ने इस बात पर जोर दिया कि आज बैंकिंग सेवाएं केवल भौतिक काउंटरों तक सीमित नहीं हैं।
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24/7 उपलब्धता: UPI, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और ATM जैसी सुविधाओं के कारण शनिवार को बैंक बंद रहने से ग्राहकों के वित्तीय लेनदेन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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समय समायोजन: अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि ग्राहकों की सुविधा और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वे दैनिक कार्य घंटों में अतिरिक्त समय देने के लिए तैयार हैं।
गौरतलब है कि वेतन समझौते के दौरान इस विषय पर पहले ही सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अब बैंक यूनियनों की नजर सरकार की अंतिम स्वीकृति पर है, ताकि देश के लाखों बैंक कर्मचारियों को अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की तरह साप्ताहिक अवकाश का लाभ मिल सके और बैंकिंग प्रणाली को अधिक टिकाऊ बनाया जा सके।