नयी दिल्ली: पूर्वी भारत की महिलाओं के बीच वित्तीय सुरक्षा और निवेश के प्रति जागरूकता की एक नई तस्वीर उभर कर सामने आई है। निजी क्षेत्र की प्रमुख जीवन बीमा कंपनी, बंधन लाइफ इंश्योरेंस ने सोमवार को अपने नवीनतम आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में महिला पॉलिसीधारकों की भागीदारी पिछले दो वर्षों में आश्चर्यजनक रूप से तीन गुना बढ़ गई है। वित्त वर्ष 2023-24 में जहां यह आंकड़ा मात्र 12 प्रतिशत था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 तक यह बढ़कर 35 प्रतिशत के प्रभावशाली स्तर पर पहुंच गया है।
पश्चिम बंगाल और बिहार अग्रणी
कंपनी के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी भारत में पश्चिम बंगाल महिलाओं के बीमा कवरेज के मामले में सबसे आगे है, जिसकी कुल क्षेत्रीय महिला पॉलिसीधारकों में हिस्सेदारी 42.84 प्रतिशत है। इसके बाद बिहार (21.46%), ओडिशा (10.67%), झारखंड (9.31%) और असम (8.54%) का स्थान आता है। यह वृद्धि दर्शाती है कि क्षेत्र की महिलाएं अब भविष्य की अनिश्चितताओं के प्रति पहले से कहीं अधिक सजग हैं।
बदलती प्रोफाइल: आत्मनिर्भरता पर जोर
बंधन लाइफ के एमडी और सीईओ सतीशेश्वर बी. ने इस बदलाव पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महिलाएं अब न केवल परिवार की देखभाल करने वाली, बल्कि मुख्य वित्तीय स्तंभ के रूप में भी उभर रही हैं। रिपोर्ट में एक दिलचस्प रुझान यह भी देखा गया है कि 46 से 65 वर्ष की परिपक्व आयु वर्ग की महिलाओं में बीमा खरीदने की रुचि बढ़ी है। इसके अलावा, गैर-वेतनभोगी और स्व-रोज़गार वाली महिलाओं की हिस्सेदारी अब कुल महिला पॉलिसीधारकों में 85 प्रतिशत हो गई है, जो वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में लगभग दोगुनी है।
यह स्पष्ट है कि महिलाएं अब अपने वित्तीय निर्णय स्वयं ले रही हैं। बंधन लाइफ का मानना है कि बीमा अब केवल एक बचत का साधन नहीं, बल्कि लंबी अवधि की वित्तीय योजना और सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बन गया है। पूर्वी भारत में महिलाओं का यह बढ़ता रुझान देश की समग्र आर्थिक स्वायत्तता और वित्तीय साक्षरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।