फोर्ब्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मुथूट परिवार भारत का सबसे अमीर ईसाई परिवार है। जिस तरह टाटा का नाम स्टील के साथ और रिलायंस का नाम पेट्रोकेमिकल्स के साथ जुड़ा है, ठीक उसी तरह मुथूट का नाम 'गोल्ड लोन' का पर्याय बन चुका है।
1. अरबों डॉलर का साम्राज्य
मुथूट परिवार की कुल संपत्ति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज उनकी नेटवर्थ 10.4 अरब डॉलर (लगभग 86,000 करोड़ रुपये) से अधिक है।
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टॉप 25 में शामिल: यह परिवार भारत के 23वें सबसे अमीर परिवार के रूप में अपनी जगह बनाए हुए है।
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संपत्ति में भारी उछाल: साल 2022 में इनकी कुल संपत्ति 4.1 अरब डॉलर थी, जो महज तीन साल में ढाई गुना से अधिक बढ़कर 10.4 अरब डॉलर हो गई है।
2. राशन की दुकान से ग्लोबल फाइनेंस तक का सफर
मुथूट ग्रुप की शुरुआत 1887 में हुई थी। उस समय इसके संस्थापक (वर्तमान पीढ़ी के दादाजी) लकड़ी और अनाज का व्यापार करते थे। वे ब्रिटिश काल के दौरान बड़े बागानों को राशन सप्लाई किया करते थे। समय के साथ व्यापार बदला और कंपनी ने गोल्ड लोन के क्षेत्र में कदम रखा, जहाँ आज इनकी एकछत्र 'मोनोपॉली' जैसी स्थिति है।
3. जॉर्ज जैकब मुथूट: साम्राज्य के वर्तमान सारथी
मुथूट ग्रुप के पूर्व अध्यक्ष एम.जी. जॉर्ज मुथूट के 2021 में निधन के बाद, उनके भाई जॉर्ज जैकब मुथूट ने कमान संभाली।
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नेटवर्थ: जॉर्ज जैकब मुथूट की व्यक्तिगत संपत्ति लगभग 3.2 बिलियन डॉलर है।
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नेटवर्क: आज मुथूट फाइनेंस की पूरे भारत में 7,300 से अधिक शाखाएं हैं।
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ग्राहक आधार: कंपनी प्रतिदिन लगभग 2,00,000 ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान करती है।
4. व्यापार का विस्तार
सिर्फ गोल्ड लोन ही नहीं, मुथूट परिवार का कारोबार अब कई अन्य क्षेत्रों में भी फैल चुका है:
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फंड ट्रांसफर: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू धन हस्तांतरण सेवाएं।
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पर्सनल और कॉर्पोरेट लोन: बैंकिंग सेवाओं की तरह विविध लोन विकल्प।
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इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट: निवेश सलाहकार और बीमा सेवाएं।
5. ईसाई समुदाय के लिए गर्व का विषय
मुथूट परिवार अपनी सफलता के साथ-साथ अपनी धार्मिक और सामाजिक जड़ों से भी मजबूती से जुड़ा हुआ है। यह परिवार केरल के सीरियन ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदाय से आता है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि ईमानदारी और विजन के साथ किया गया छोटा सा व्यापार भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकता है।
निष्कर्ष
आज जब हम भारत की आर्थिक शक्ति की बात करते हैं, तो मुथूट परिवार का योगदान अतुलनीय है। गोल्ड लोन सेक्टर में उनकी पकड़ और साल-दर-साल बढ़ती उनकी दौलत ने उन्हें न केवल ईसाई समुदाय का बल्कि पूरे देश का एक प्रतिष्ठित औद्योगिक घराना बना दिया है।