मास्को और जामनगर का 'ऑयल कनेक्शन' एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी कच्चे तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों ने रूसी तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं।
यहाँ रिलायंस के इस कदम और इसके भू-राजनीतिक (Geopolitical) असर पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट है:
रिलायंस और रूसी तेल: प्रतिबंधों के बीच 'नया रास्ता'
विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स, विशेष रूप से 'ब्लूमबर्ग' के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने अपनी जामनगर रिफाइनरी के लिए रूसी कच्चे तेल की सप्लाई फिर से शुरू कर दी है। गौर करने वाली बात यह है कि इस बार रिलायंस ने अपनी रणनीति बदलते हुए उन रूसी कंपनियों से हाथ मिलाया है, जिन पर अमेरिका या यूरोपीय संघ का कोई प्रत्यक्ष प्रतिबंध (Sanctions) नहीं है।
1. गैर-प्रतिबंधित कंपनियों से करार
अक्टूबर 2024 में जब अमेरिका ने रूस के दो सबसे बड़े तेल उत्पादकों— रोसनेफ्ट (Rosneft) और लुकोइल (Lukoil) पर प्रतिबंध लगाए थे, तब रिलायंस ने एहतियातन रूसी तेल की खरीद रोक दी थी। लेकिन अब रिलायंस 'रुसएक्सपोर्ट' (RusExport) जैसे गैर-प्रतिबंधित सप्लायर्स के साथ अफ्रामैक्स (Aframax) टैंकर्स के जरिए तेल मंगा रही है।
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क्षमता: यह तेल गुजरात स्थित उस रिफाइनरी में भेजा जा रहा है, जिसकी क्षमता 6,60,000 बैरल प्रतिदिन है और जो मुख्य रूप से घरेलू बाजार की जरूरतों को पूरा करती है।
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डिस्काउंट का लाभ: रूस अभी भी भारतीय रिफाइनरियों को रियायती दरों (Discounted Rates) पर तेल दे रहा है, जो रिलायंस के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद है।
2. अमेरिका और यूरोप की बढ़ सकती है टेंशन
रिलायंस के इस फैसले से वाशिंगटन और ब्रसेल्स में हलचल तेज होना स्वाभाविक है। अमेरिका ने रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए उसके तेल निर्यात को निशाना बनाया है। भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर पहले से ही 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ जैसी चर्चाएं और दबाव रहे हैं।
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पश्चिमी देशों की सोच: अमेरिका और यूरोप का मानना है कि रूसी तेल की हर खरीद क्रेमलिन को युद्ध जारी रखने के लिए फंड मुहैया कराती है।
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रिलायंस की चतुराई: कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए केवल उन संस्थाओं के साथ लेन-देन शुरू किया है जो प्रतिबंधित सूची से बाहर हैं, जिससे कानूनी रूप से उस पर उंगली उठाना मुश्किल है।
3. भारत की ऊर्जा सुरक्षा और बाजार की स्थिति
रिलायंस की वापसी से रूसी तेल की भारत में गिरती हिस्सेदारी को सहारा मिलेगा। हाल के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने रूसी तेल के आयात में 50% तक की गिरावट की आशंका थी, लेकिन भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दोबारा सक्रिय होने से यह अंतर कम हो सकता है।
4. जामनगर: दुनिया का तेल हब
जामनगर रिफाइनरी दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स है। इसकी जटिल तकनीक इसे दुनिया के किसी भी कोने से आने वाले 'भारी' या 'हल्के' कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता देती है। यही कारण है कि रूसी ग्रेड का तेल यहाँ आसानी से रिफाइन कर वैश्विक मानकों का पेट्रोल-डीजल बनाया जा सकता है।