भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज ने आंध्र प्रदेश में एक ऐतिहासिक निवेश की घोषणा की है। कंपनी विशाखापट्टनम में ₹1.6 लाख करोड़ की लागत से दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर्स में से एक स्थापित करने जा रही है। यह परियोजना न केवल भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में देश की वैश्विक धाक भी जमाएगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
इस मेगा प्रोजेक्ट की कुल क्षमता 1.5 गीगावाट होगी, जो इसे क्षेत्र में मौजूद गूगल जैसी बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट्स से भी विशाल बनाती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग: इस प्रोजेक्ट की खास बात इसका ईको-फ्रेंडली होना है। निवेश का एक बड़ा हिस्सा, लगभग ₹51,300 करोड़, सोलर-बैटरी स्टोरेज सिस्टम पर खर्च किया जाएगा ताकि डेटा सेंटर को स्वच्छ ऊर्जा मिल सके।
- चरणबद्ध विकास: परियोजना को तीन चरणों में बांटा गया है। पहला चरण अक्टूबर 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें 500 मेगावाट की क्षमता विकसित की जाएगी। 2030 तक इस क्लस्टर को अपनी पूरी क्षमता पर लाने का लक्ष्य है।
आंध्र प्रदेश की नई पहचान
भोगापुरम एयरपोर्ट के पास स्थित यह क्लस्टर आंध्र प्रदेश को 'डेटा सेंटर हब' के रूप में स्थापित करेगा। राज्य सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 4.0 के तहत मिल रहे प्रोत्साहन, जैसे कैपिटल सब्सिडी और जीएसटी रिइम्बर्समेंट, ने रिलायंस के साथ-साथ सिफी (Sify) और डिजिटल कनेक्शन जैसी कंपनियों को भी आकर्षित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। विशाखापट्टनम में केबल लैंडिंग स्टेशन और डीसैलिनेशन प्लांट की स्थापना से यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का प्रमुख केंद्र बन जाएगा। भारत में बढ़ती डेटा खपत और क्लाउड सेवाओं की मांग को देखते हुए, रिलायंस का यह कदम भविष्य की डिजिटल क्रांति की नींव रखेगा।