सोने की चमक भारतीयों के लिए हमेशा से निवेश और परंपरा का संगम रही है। लेकिन वर्ष 2025 में सोने की कीमतों ने जिस तरह की छलांग लगाई है, उसने न केवल मध्यम वर्ग बल्कि उच्च वर्ग के खरीदारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। जब 10 ग्राम सोने की कीमत 1.40 लाख रुपये के पार पहुंच जाए, तो खरीदारी का तरीका बदलना स्वाभाविक है। भारतीय उपभोक्ताओं ने इस 'गोल्डन क्राइसिस' से निपटने के लिए एक व्यावहारिक और स्मार्ट रास्ता निकाला है—कैरेट में कटौती।
सोने की कीमतों में 'आग' और बदलता बाजार
दिसंबर 2025 तक आते-आते सर्राफा बाजार एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। अहमदाबाद से लेकर दिल्ली और मुंबई के बाजारों में अब 22 कैरेट (91.6% शुद्धता) के पारंपरिक आभूषणों की जगह 14 और 18 कैरेट की ज्वैलरी ने मुख्य जगह बना ली है।
1. शुद्धता के साथ बजट का तालमेल
पुराने समय में 14 या 18 कैरेट सोने को केवल हीरे या कीमती पत्थरों की जड़ाई के लिए इस्तेमाल किया जाता था क्योंकि वह सख्त होता है। लेकिन आज, प्लेन गोल्ड की चूड़ियाँ, चेन और झुमके भी कम कैरेट में बन रहे हैं।
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18 कैरेट (75% सोना): यह उन लोगों के लिए पहली पसंद बन रहा है जो शादियों के लिए भारी दिखने वाले सेट चाहते हैं लेकिन बजट कम है।
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14 कैरेट (58.5% सोना): यह सेगमेंट डेली वियर और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है, जो 'लाइटवेट' और आधुनिक डिजाइन पसंद करते हैं।
2. मांग में भारी गिरावट और नए आंकड़े
ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमतों में आई 100% से अधिक की तेजी (80 हजार से 1.42 लाख तक) ने 22 कैरेट की मांग को आधा कर दिया है।
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दो साल पहले: कुल बिक्री में 22 कैरेट की हिस्सेदारी 75% थी।
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वर्तमान स्थिति: अब यह घटकर 50% से भी कम रह गई है। पारुल जैसे लाखों ग्राहक अब यह गणित लगा रहे हैं कि मुख्य आभूषण (जैसे मंगलसूत्र या हार) 22 कैरेट में हों, लेकिन अन्य सहायक गहने (ब्रेसलेट या अंगूठी) 14-18 कैरेट में बनवाकर बजट संतुलित किया जाए।
आखिर सोना इतना महंगा क्यों हुआ? (ग्लोबल फैक्टर)
सोने की कीमतों में इस 'सुनामी' के पीछे कोई एक कारण नहीं है, बल्कि वैश्विक अस्थिरता की पूरी श्रृंखला है:
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जियोपॉलिटिकल टेंशन: रूस-यूक्रेन युद्ध का लंबा खिंचना और वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। जब दुनिया में अनिश्चितता होती है, तो 'गोल्ड' को सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है।
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नाइजीरिया और मध्य पूर्व में संघर्ष: ISIS के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय अस्थिरता ने कच्चे तेल और कीमती धातुओं की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है।
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां: अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीद ने सोने को निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया है। डॉलर की तुलना में सोने में निवेश बढ़ना कीमतों को ऊपर ले जा रहा है।
निष्कर्ष: परंपरा और व्यावहारिकता का संतुलन
भारतीय शादियाँ सोने के बिना अधूरी हैं, इसलिए मांग कभी शून्य नहीं होगी। लेकिन 2025 का यह ट्रेंड बताता है कि अब भारतीय ग्राहक केवल 'शुद्धता' के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि वे अपनी 'जेब और जरूरत' के बीच संतुलन बनाना सीख गए हैं। ज्वैलरी ब्रांड्स भी अब 14 और 18 कैरेट के शानदार कलेक्शन लॉन्च कर रहे हैं, जिससे कम बजट में भी ग्राहकों को 'गोल्डन फील' मिल सके।