﻿<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?><rss version="2.0"><channel><title>Ajmer Vocals</title><link>https://ajmervocals.com/</link><description>News Helpline is a India based entertainment news agency which provides the latest showbiz stories, Photos, Videos and features to print, online and broadcast media.</description><copyright>Copyright 2017 newshelpline.com. All rights reserved.</copyright><item><title>Petrol Diesel Price Today%3A पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट जारी, चेक कर लें अपने शहर का भाव</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/petrol9099351.jpg</Image><description>&lt;p&gt;आज शुक्रवार, 22 मई को सुबह काम पर निकलने वाले आम आदमी के लिए फिलहाल राहत की खबर है। देशभर में आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है और दाम पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। हालांकि, तेल वितरण कंपनियों (OMCs) की बिगड़ती वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह शांति ज्यादा दिनों तक टिकने की उम्मीद नहीं है, और आने वाले दिनों में ईंधन के दामों में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कंपनियों को रोजाना ₹750 करोड़ का भारी नुकसान&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की आर्थिक स्थिति इस वक्त काफी दबाव में है। कंपनियां फिलहाल पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी सिलेंडर को उनकी वास्तविक लागत से काफी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन कंपनियों को पहले रोजाना करीब 1,380 करोड़ रुपये का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा था। हाल ही में ईंधन की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद यह दैनिक घाटा घटकर अब लगभग 750 करोड़ रुपये रह गया है। इस लगातार हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां कभी भी नई दरें लागू कर सकती हैं।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इस हफ्ते पहले ही बढ़ चुके हैं दाम&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;आम जनता को इस हफ्ते की शुरुआत में ही महंगाई का झटका लग चुका है, जब पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। इस हालिया वृद्धि के बाद से देशभर में फ्यूल के रेट अपने रिकॉर्ड स्तर पर बने हुए हैं। यदि कंपनियां अपने घाटे को कम करने के लिए एक बार फिर कीमतें बढ़ाती हैं, तो इसका सीधा असर माल ढुलाई और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ेगा&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//petrol-price-increase/59891</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>रोइंग में उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक स्वर्णिम पुनरुत्थान%3A जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में बालक टीम ने 36 साल बाद जीता गोल्ड, मध्य प्रदेश और आर्मी बॉयज बने ओवरऑल चैंपियन</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/raigad5499061.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;गोरखपुर:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित 46वीं जूनियर नेशनल रोइंग चैंपियनशिप (Junior National Rowing Championship) का अंतिम दिन मेजबान राज्य के लिए ऐतिहासिक और बेहद भावुक क्षण लेकर आया। गुरुवार को प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबलों में उत्तर प्रदेश की बालक क्वाड्रुपल स्कल (Quadruple Sculls) टीम ने पानी की लहरों पर अद्भुत तालमेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया। इस शानदार जीत के साथ ही उत्तर प्रदेश का इस प्रतिष्ठित चैंपियनशिप के बालक वर्ग में पिछले 36 वर्षों से चला आ रहा खिताबी सूखा आखिरकार समाप्त हो गया। उत्तर प्रदेश के होनहार नाविकों&amp;mdash;दीपक कुमार, यश कुमार यादव, हरिनाथ यादव और प्रवीण कुमार की चौकड़ी ने 2000 मीटर के इस कड़े ट्रैक पर महज 7 मिनट 43.12 सेकंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में केरल की टीम (8 मिनट 02.05 सेकंड) को रजत और आर्मी बॉयज स्पोर्ट्स कंपनी (8 मिनट 13.08 सेकंड) को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन की बदौलत उत्तर प्रदेश बालक वर्ग की ओवरऑल तालिका में तीसरे स्थान पर रहा।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;इससे पहले उत्तर प्रदेश को रोइंग के इस जूनियर स्तर पर आखिरी बड़ी सफलता साल 1990 में लखनऊ राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान मिली थी, जब हरपाल सिंह और नफीस अहमद की जोड़ी ने बालक पेयर्स वर्ग में रजत पदक जीता था। चैंपियनशिप के समापन पर पदक तालिका की बात करें तो बालक वर्ग में 'आमी बॉयज स्पोर्ट्स कंपनी' ने दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक के साथ ओवरऑल चैंपियन की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। दूसरी ओर, बालिका वर्ग में मध्य प्रदेश की टीम ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य के साथ राष्ट्रीय चैंपियनशिप की ट्रॉफी अपने नाम की। हालांकि, बालिका डबल स्कल (Double Sculls) के व्यक्तिगत फाइनल में महाराष्ट्र की शिवरानी कटेरिया और आरुषी बरार की जोड़ी ने 9 मिनट 25.7 सेकंड के बेहतरीन समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि मध्य प्रदेश को रजत और मणिपुर को कांस्य पदक मिला।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//raigad-mein-uttar-pradesh-ka-etihasik-pradarshan/59890</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>LIC Q4 Results%3A देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी का 23% बढ़ा मुनाफा, अब निवेशकों की जेब में आएगा ₹10 का डिविडेंड!</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/lic7582141.jpg</Image><description>&lt;p&gt;देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4FY26) के शानदार नतीजे घोषित किए हैं। कंपनी ने सालाना आधार पर अपने कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफे (Net Profit) में 23 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। इस तिमाही में एलआईसी का मुनाफा बढ़कर 23,467 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 19,039 करोड़ रुपये था।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;मजबूत वित्तीय नतीजों के साथ ही एलआईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अपने शेयरधारकों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 10 रुपये के फाइनल डिविडेंड (लाभांश) की सिफारिश की है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;प्रीमियम आय और निवेश में शानदार बढ़त&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;समीक्षाधीन तिमाही के दौरान एलआईसी की नेट प्रीमियम इनकम 12% की वृद्धि के साथ 1.65 लाख करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल 1.48 लाख करोड़ रुपये थी। कंपनी के रिन्यूअल और सिंगल प्रीमियम सेगमेंट में आए उछाल से इस आय को सहारा मिला। पहले साल की प्रीमियम आय भी 17% बढ़कर 13,009 करोड़ रुपये रही। वहीं, एलआईसी की निवेश से होने वाली आय करीब 17% की तेजी के साथ 1.09 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 93,443 करोड़ रुपये थी।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सॉल्वेंसी रेशियो में सुधार&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;LIC का कुल सरप्लस बढ़कर 89,058 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, इस दौरान प्रबंधन और कर्मचारियों के वेतन पर होने वाले खर्चों में भी वृद्धि देखी गई। राहत की बात यह है कि 31 मार्च, 2026 तक कंपनी का सॉल्वेंसी रेशियो सुधरकर 2.35 हो गया है, जो पिछले साल 2.11 था और यह नियामक (Regulatory) आवश्यकताओं से काफी ऊपर है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//lic-q4-results/59889</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>Cockroach Janta Party नाम पर मची होड़, ट्रेडमार्क के लिए तीन आवेदन दाखिल</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/cjp8295041.jpg</Image><description>&lt;p&gt;सोशल मीडिया पर अपने अनोखे अंदाज से तेजी से चर्चा में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Cockroach Janta Party) अब कानूनी और कारोबारी वजहों से सुर्खियों में आ गई है। इस नाम पर अपना मालिकाना हक (अधिकार) हासिल करने के लिए तीन अलग-अलग पक्षों द्वारा ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल किए गए हैं। आधिकारिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक, ये सभी आवेदन ट्रेडमार्क रजिस्ट्री पोर्टल पर दर्ज किए गए हैं, जिसके बाद इस नाम को लेकर कानूनी रस्साकशी शुरू हो गई है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;व्यंग्य से शुरू हुआ था सोशल मीडिया का सफर&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;'कॉकरोच जनता पार्टी' की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक प्लेटफॉर्म के तौर पर हुई थी। लॉन्च होने के कुछ ही दिनों के भीतर इसके मजेदार वीडियो, पोस्ट और तीखी ऑनलाइन कमेंट्री को सोशल मीडिया पर लाखों व्यूज मिलने लगे। इसकी लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि बड़ी संख्या में लोग इस अकाउंट को फॉलो करने लगे और इसके डिजिटल कैंपेन इंटरनेट पर वायरल हो गए।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;&lt;strong&gt;X अकाउंट ब्लॉक होने के बाद बढ़ा विवाद&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर तंज कसने वाला एक बेहतरीन ऑनलाइन ट्रेंड बताया था। हालांकि, लोकप्रियता के चरम पर पहुंचने के बाद इस संगठन के आधिकारिक 'X' (ट्विटर) अकाउंट को भारत में कानूनी या नियामक कारणों से रोक (Block) दिया गया। अकाउंट ब्लॉक होने के बाद इस नाम को अपने बिजनेस ब्रांड के रूप में रजिस्टर कराने की होड़ मच गई है, जिससे यह डिजिटल मीम अब एक गंभीर कानूनी मुद्दा बन चुका है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//cockroach-janta-aparty/59887</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>जिनेवा में बोले स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, AI से हेल्थ सेक्टर में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/jineva7414471.jpg</Image><description>&lt;p&gt;केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित&amp;nbsp;&lt;strong&gt;79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (79th World Health Assembly)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;में वैश्विक मंच पर स्वास्थ्य के क्षेत्र में आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भारत का विज़न पेश किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके सुरक्षित उपयोग के लिए मजबूत कानून, नैतिक निगरानी (Ethical Oversight) और समानता बेहद जरूरी है, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंच सके।&lt;/p&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;डिजिटल इंडिया से 'आयुष्मान भारत' तक का सफर&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;स्वास्थ्य मंत्री ने वैश्विक नेताओं के सामने भारत के डिजिटल हेल्थ सफर का खाका प्रस्तुत किया:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मजबूत नींव (2015):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत ने साल 2015 में 'डिजिटल इंडिया' अभियान के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटलीकरण की मजबूत नींव रखी थी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (2017):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;साल 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में एक ऐसे डिजिटल और आपस में जुड़े हेल्थ इकोसिस्टम की कल्पना की गई थी, जो मरीजों और डॉक्टरों को एक मंच पर लाए।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (2021):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;इसी दूरदर्शी सोच के तहत साल 2021 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य देश के नागरिकों के स्वास्थ्य डेटा (Health Data) को पूरी तरह सुरक्षित और उनकी सहमति (Consent-based) के आधार पर डिजिटल रूप में उपलब्ध कराना है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;भारत की 'SAHI' नीति और 'BODH' प्लेटफॉर्म&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;जेपी नड्डा ने कहा कि सिर्फ डेटा इकट्ठा करना और डिजिटलीकरण करना काफी नहीं है; AI के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए कड़े नियम होने चाहिए। इस दिशा में उन्होंने भारत के दो बड़े कदमों का जिक्र किया:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;SAHI (स्ट्रेटेजी फॉर एआई इन हेल्थकेयर फॉर इंडिया):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;फरवरी 2026 में लॉन्च हुई इस रणनीति को भारत की 'हेल्थ AI नीति' का एक ऐतिहासिक कदम बताया गया। यह 'ग्लोबल साउथ' (Global South) से आने वाली पहली ऐसी व्यापक रणनीति है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में AI को पारदर्शी, नैतिक और जनहित में लागू करने पर जोर देती है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;BODH प्लेटफॉर्म:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत 1.4 अरब (140 करोड़) की विशाल आबादी, 22 आधिकारिक भाषाओं और विविध स्वास्थ्य चुनौतियों वाला देश है। ऐसे में AI के सही क्रियान्वयन के लिए भारत ने&amp;nbsp;&lt;strong&gt;BODH प्लेटफॉर्म&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तैयार किया है। यह प्लेटफॉर्म इस बात की कड़ाई से जांच करेगा कि कोई भी AI सिस्टम भारत की विविध परिस्थितियों और अलग-अलग जेनेटिक्स के लोगों पर सटीक, सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है या नहीं।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//gineva-mein-bola-swastha-mantri-jp-nadda/59885</link><pubDate>5/22/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए यूरोप का नया प्रवेश द्वार%3A मुंबई में खुला यूरोबैंक का पहला कार्यालय, सीमा-पार निवेश और व्यापार को मिलेगी गति</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/corperate2366571.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुंबई:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते आर्थिक व रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए पांच प्रमुख यूरोपीय देशों में सक्रिय 'यूरोबैंक' (Eurobank) ने भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में अपने पहले प्रतिनिधि कार्यालय की स्थापना की है। यह भारत के बैंकिंग इतिहास में एक युगांतरकारी क्षण है, क्योंकि यह देश में ग्रीस (यूनान) और साइप्रस के किसी वित्तीय संस्थान की पहली भौतिक उपस्थिति (Physical Presence) है। इस ऐतिहासिक कार्यालय का भव्य उद्घाटन साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडिस की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया, जिसमें भारत, यूनान और साइप्रस के वरिष्ठ राजनयिकों, सरकारी अधिकारियों और शीर्ष उद्योगपतियों ने हिस्सा लिया।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;यूरोबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) फोकियन करावियास ने इस रणनीतिक विस्तार पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई का यह नया केंद्र केवल एक प्रशासनिक कार्यालय नहीं, बल्कि यूरोप में पैर पसारने की इच्छुक भारतीय कंपनियों के लिए एक मजबूत सेतु का काम करेगा। बैंक मुख्य रूप से व्यापारिक गठजोड़ को बढ़ावा देने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने और भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों में सुगमता से प्रवेश दिलाने पर ध्यान केंद्रित करेगा। यह पहल भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए एक महत्वपूर्ण संबल साबित होगी।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;यूरोबैंक वर्तमान में यूनान, साइप्रस, लक्ज़मबर्ग, बुल्गारिया और ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर परिचालन करता है, जिससे भारतीय व्यवसायों को एक ही खिड़की के माध्यम से पांच बड़े यूरोपीय बाजारों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय समावेशन और प्रवासियों की सुविधा के लिए बैंक ने भारत के डिजिटल यूपीआई (UPI) प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए ग्रीस से भारत के लिए एक अत्याधुनिक सीमा-पार प्रेषण (Cross-Border Remittance) सेवा भी शुरू की है, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच धन प्रेषण बेहद सुरक्षित और त्वरित हो जाएगा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//indian-corperate/59882</link><pubDate>5/21/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>बंगाल में कार्रवाई का केंद्र बने अभिषेक बनर्जी, सीएम कुर्सी से ममता के हटते ही भतीजे को लगे ये झटके</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/_upload_additional_250500_438734879982461.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कोलकाता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पश्चिम बंगाल की राजनीति में 15 साल पुराने ममता बनर्जी के शासन के अंत के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य में पहली बार सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आते ही अभिषेक बनर्जी अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के मुख्य केंद्र बन चुके हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के लगातार हमलों और कड़े फैसलों के बीच अभिषेक को एक के बाद एक कई बड़े झटके लग रहे हैं।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;9 मई 2026 को ऐतिहासिक 207 सीटें जीतकर बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शुभेंदु अधिकारी ने पद संभालते ही टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर धमकी भरा बयान देने और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक बड़ी एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इसके अलावा, जांच एजेंसियों द्वारा उनकी कथित अवैध संपत्तियों का ब्योरा भी सार्वजनिक किया जा रहा है, जिसने टीएमसी खेमे में खलबली मचा दी है।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;अभिषेक बनर्जी के लिए राजनीतिक मोर्चे पर भी स्थितियां अनुकूल नहीं दिख रही हैं। उनके सबसे भरोसेमंद और करीबी साथी माने जाने वाले टीएमसी नेता जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर फलता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने से पैर पीछे खींच लिए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी से ममता बनर्जी के हटते ही अभिषेक बनर्जी के इर्द-गिर्द का सुरक्षा कवच पूरी तरह टूट चुका है। बीजेपी सरकार के इस आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में डायमंड हार्बर के सांसद की कानूनी और राजनीतिक राह और भी ज्यादा कांटों भरी होने वाली है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//bengal-mein-karvayi-kendra/59875</link><pubDate>5/20/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>‘चुनाव खत्म वसूली शुरू’, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर विपक्ष हमलावर, अखिलेश बोले- साइकिल ही विकल्प</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/petrol6474761.jpg</Image><description>&lt;br /&gt;
&lt;p&gt;आज शुक्रवार, 15 मई 2026 से देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;3 रुपये प्रति लीटर&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस आर्थिक झटके के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से 5 दिनों की विदेश यात्रा (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) पर रवाना हो रहे हैं। इन दोनों घटनाक्रमों को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;इमरान प्रतापगढ़ी का 'महंगाई का तोहफा' तंज&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद&amp;nbsp;&lt;strong&gt;इमरान प्रतापगढ़ी&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा और ईंधन की कीमतों को जोड़ते हुए लिखा:&lt;/p&gt;

&lt;blockquote&gt;
&lt;p&gt;&amp;quot;उधर मोदी जी विदेश यात्रा पर गए और इधर देश को पेट्रोल और डीजल की मंहगाई का तोहफा देकर गए। काश अभी तक चुनाव चल रहे होते तो पेट्रोल-डीजल मंहगा ना होता। चुनाव खत्म होते ही जनता की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया गया है।&amp;quot;&lt;/p&gt;
&lt;/blockquote&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;अखिलेश यादव का 'साइकिल' वाला कटाक्ष&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;सपा प्रमुख&amp;nbsp;&lt;strong&gt;अखिलेश यादव&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने भी बढ़ते तेल के दामों पर चुटकी ली है। उन्होंने एक राजनीतिक कार्टून साझा करते हुए लिखा:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;&amp;quot;आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है।&amp;quot;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;p&gt;अखिलेश यादव का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी की उस हालिया अपील के जवाब में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने नागरिकों से ईंधन बचाने के लिए सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करने को कहा था। अखिलेश ने संकेत दिया कि सरकार की नीतियों ने आम आदमी को वापस साइकिल पर आने को मजबूर कर दिया है।&lt;/p&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;डेरेक ओ&amp;rsquo;ब्रायन का 'चोट और वोट' वाला हमला&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद&amp;nbsp;&lt;strong&gt;डेरेक ओ&amp;rsquo;ब्रायन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने इस बढ़ोतरी को &amp;quot;बेहद दुखद और अनुमानित&amp;quot; बताया। उन्होंने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वोट की लूट:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;&amp;quot;पहले वे आपके वोट को लूटते हैं, फिर आपको वहीं चोट पहुँचाते हैं जहाँ सबसे ज्यादा दर्द होता है।&amp;quot;&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बंगाल सरकार और VAT:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;डेरेक ने पश्चिम बंगाल में बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों की ओर इशारा करते हुए पूछा कि क्या अब बंगाल की (भाजपा नियंत्रित) सरकार वैट (VAT) कम करेगी? उन्होंने तंज कसा कि अब तो वहां &amp;quot;दिल्ली द्वारा नियंत्रित सरकार&amp;quot; है, जिसे केंद्र से फंड रोके जाने की चिंता नहीं होनी चाहिए।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें (15 मई 2026)&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;ईंधन की कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद प्रमुख शहरों में दाम कुछ इस प्रकार हैं:&lt;/p&gt;

&lt;table&gt;
	&lt;thead&gt;
		&lt;tr&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;शहर&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;पेट्रोल (प्रति लीटर)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;डीजल (प्रति लीटर)&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
		&lt;/tr&gt;
	&lt;/thead&gt;
	&lt;tbody&gt;
		&lt;tr&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;दिल्ली&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹97.77 (&amp;uarr; ₹3.00)&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹90.67 (&amp;uarr; ₹3.00)&lt;/td&gt;
		&lt;/tr&gt;
		&lt;tr&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;कोलकाता&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹108.74 (&amp;uarr; ₹3.29)&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹95.13 (&amp;uarr; ₹3.11)&lt;/td&gt;
		&lt;/tr&gt;
		&lt;tr&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;मुंबई&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹106.68 (&amp;uarr; ₹3.14)&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹93.14 (&amp;uarr; ₹3.11)&lt;/td&gt;
		&lt;/tr&gt;
		&lt;tr&gt;
			&lt;td&gt;&lt;strong&gt;चेन्नई&lt;/strong&gt;&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹103.67 (&amp;uarr; ₹2.83)&lt;/td&gt;
			&lt;td&gt;₹95.25 (&amp;uarr; ₹2.86)&lt;/td&gt;
		&lt;/tr&gt;
	&lt;/tbody&gt;
&lt;/table&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//chunaav-khatam-vasooli-shuru/59847</link><pubDate>5/15/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>PM Modi Appeal - CM मोहन यादव भी कम करेंगे काफिले की गाड़ियां, राज्य में जारी किए दिशा-निर्देश</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/pm-modi7347581.jpg</Image><description>&lt;p&gt;मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री&amp;nbsp;&lt;strong&gt;डॉ. मोहन यादव&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययता और ईंधन संरक्षण की अपील को धरातल पर उतारने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने स्वयं के काफिले (कारकेड) और राज्य के मंत्रियों के दौरों के लिए सख्त और सादगीपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;काफिले में कटौती और वाहन रैलियों पर रोक&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब उनके काफिले में केवल सुरक्षा की दृष्टि से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;न्यूनतम और आवश्यक वाहन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ही शामिल होंगे। इस पहल के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नो वाहन रैली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अब मुख्यमंत्री के किसी भी दौरे या भ्रमण के दौरान भारी-भरकम वाहन रैलियां आयोजित नहीं की जाएंगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मंत्रियों से अपील:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;सीएम ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों से भी आग्रह किया है कि वे यात्रा के समय कम से कम गाड़ियों का उपयोग करें।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दिखावे से दूरी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;नवनियुक्त निगम-मंडल पदाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना कार्यभार सादगी के साथ ग्रहण करें।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;राष्ट्रहित सर्वोपरि: ईंधन और डॉलर बचाने की मुहिम&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले को सीधे तौर पर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;राष्ट्रहित&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;और अर्थव्यवस्था से जोड़ा है। उनका मानना है कि:&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ईंधन संरक्षण:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर होने वाला देश का खर्च (डॉलर) भी बचेगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;अनुशासन और परिवर्तन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मुख्यमंत्री के अनुसार, देश को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए वीआईपी संस्कृति को छोड़कर जीवन पद्धति में अनुशासन लाना अनिवार्य है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सार्वजनिक परिवहन का संदेश:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मुख्यमंत्री ने खुद दिल्ली मेट्रो में सफर कर यह साबित किया कि 'विकास और विश्वास' आमजन के साथ जुड़कर ही मजबूत होते हैं।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;जनता से अपील: 'पब्लिक ट्रांसपोर्ट' अपनाएं&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;मुख्यमंत्री ने प्रदेश की जनता से भी भावुक अपील की है। उन्होंने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी मेट्रो यात्रा साझा करते हुए नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी दैनिक दिनचर्या में&amp;nbsp;&lt;strong&gt;सार्वजनिक परिवहन (Public Transport)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को प्राथमिकता दें।&lt;/p&gt;

&lt;blockquote&gt;
&lt;p&gt;&amp;quot;आदरणीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर मध्य प्रदेश राष्ट्रहित में संकल्पित है। आगामी आदेश तक मेरे कारकेड में न्यूनतम वाहन होंगे। हम सबको मिलकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए।&amp;quot; &amp;mdash;&amp;nbsp;&lt;strong&gt;डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;/blockquote&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//pm-modi-appeal/59846</link><pubDate>5/15/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>प्रशासनिक अनुशासन - फडणवीस सरकार का &amp;#39;एक्शन मोड&amp;#39;, मंत्रियों और अफसरों के विदेश दौरों पर पूर्ण प्रतिबंध</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/anushasan9674241.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मुंबई:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;महाराष्ट्र में प्रशासनिक खर्चों में कटौती और राजकोषीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री&amp;nbsp;&lt;strong&gt;देवेंद्र फडणवीस&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने एक बड़ा साहसिक कदम उठाया है। बुधवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकों के बाद मुख्यमंत्री ने राज्य के मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के सभी आगामी विदेश दौरों को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश दिया है। यह निर्देश उन यात्राओं पर भी लागू होगा जिन्हें पहले ही आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी थी।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;मितव्ययिता और ईंधन संरक्षण पर जोर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन और विदेशी मुद्रा संरक्षण की अपील के बाद फडणवीस सरकार ने राज्य में 'मितव्ययिता अभियान' (Austerity Drive) शुरू किया है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;काफिले में कटौती:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मुख्यमंत्री ने अपने स्वयं के और सभी मंत्रियों के सुरक्षा काफिले (Convoy) में वाहनों की संख्या को&amp;nbsp;&lt;strong&gt;50 प्रतिशत&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कम करने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य न केवल ईंधन बचाना है, बल्कि आम जनता को होने वाली असुविधा को भी कम करना है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डिजिटल गवर्नेंस:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अब अंतरराष्ट्रीय बैठकों और परामर्शों के लिए विदेश जाने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तर के अधिकारियों को भी अब अनावश्यक रूप से मंत्रालय नहीं बुलाया जाएगा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहन&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;सरकारी फिजूलखर्ची रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को लग्जरी के बजाय लोक सेवा के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश दिया है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मेट्रो और बस का उपयोग:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मंत्रियों और अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम एक दिन&amp;nbsp;&lt;strong&gt;मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ईवी (EV) की ओर कदम:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;शासन ने सरकारी बेड़े में पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अब सरकारी विमानों और हेलीकॉप्टरों का उपयोग भी सीमित कर दिया गया है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;राज्यपाल&amp;nbsp;&lt;strong&gt;जिष्णु देव वर्मा&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने भी मुख्यमंत्री के इस अभियान का समर्थन करते हुए अपने काफिले को छोटा करने के निर्देश दिए हैं। जानकारों का मानना है कि इन कदमों से राज्य के खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ कम होगा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा के संरक्षण में मदद मिलेगी।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//prashasnik-anushasan/59829</link><pubDate>5/14/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>आभूषण बाजार में बदलाव की लहर आयात शुल्क में वृद्धि से 14 और 18 कैरेट के गहनों का बढ़ेगा चलन</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/modi9158291.jpg</Image><description>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नयी दिल्ली:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;केंद्र सरकार द्वारा सोने और चांदी के आयात शुल्क को&amp;nbsp;&lt;strong&gt;6% से बढ़ाकर 15%&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;करने के फैसले ने भारतीय आभूषण उद्योग को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया है। बुधवार,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;13 मई 2026&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को उद्योग विशेषज्ञों और प्रमुख आभूषण विक्रेताओं ने संकेत दिया कि इस नीतिगत बदलाव से घरेलू बाजार में अब&amp;nbsp;&lt;strong&gt;कम कैरेट (14k और 18k)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;वाले गहनों की मांग में जबरदस्त उछाल आने की संभावना है। विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से सोने की खुदरा कीमतों में प्रति 10 ग्राम&amp;nbsp;&lt;strong&gt;₹8,000 से ₹10,000&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक की वृद्धि देखी जा सकती है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;डिजाइन और सस्टेनेबिलिटी पर जोर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;आयात शुल्क बढ़ने से न केवल कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि उपभोक्ताओं के व्यवहार में भी बदलाव आएगा।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;लाइटवेट और ट्रेंडी ज्वेलरी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कल्याण ज्वेलर्स और अन्य प्रमुख ब्रांडों का मानना है कि अब उपभोक्ता भारी आभूषणों के बजाय 18 कैरेट के बारीक कारीगरी वाले गहनों को प्राथमिकता देंगे। इससे डिजाइन की विविधता बढ़ेगी और शुद्ध सोने की खपत कम होगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पुराने सोने का पुनर्चक्रण (Recycling):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;धीरसन ज्वेलर्स के अनुसार, भारतीयों के घरों में लगभग&amp;nbsp;&lt;strong&gt;25,000 टन सोना&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;निष्क्रिय पड़ा है। शुल्क वृद्धि के बाद अब लोग पुराने गहनों को बदलकर नए डिजाइन लेने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;बाजार विशेषज्ञों की चिंताएं और सुझाव&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;विशेषज्ञों ने इस वृद्धि के साथ-साथ कुछ चुनौतियों की ओर भी इशारा किया है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मांग में गिरावट:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हेतल वकील वालिया जैसी डिजाइनरों का मानना है कि कीमतों में वृद्धि से ग्रामीण और मूल्य-संवेदनशील बाजारों में मांग&amp;nbsp;&lt;strong&gt;10-15%&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक गिर सकती है, जिसका असर कारीगरों और सुनारों के रोजगार पर पड़ सकता है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ग्रे मार्केट का खतरा:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;अर्थ भारत इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सचिन सावरिकर ने चेतावनी दी है कि शुल्क में अत्यधिक वृद्धि से 'ग्रे मार्केट' या तस्करी को बढ़ावा मिल सकता है, जैसा कि 2013 के दौरान देखा गया था।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;हालांकि, मुथूट और मन्नापुरम जैसी गोल्ड लोन कंपनियों के लिए यह सकारात्मक खबर है क्योंकि गिरवी रखे सोने की वैल्यू बढ़ने से उनका कोलैटरल मजबूत होगा। सरकार का यह कदम अंततः भारतीयों को सोने के अधिक समझदारीपूर्ण और टिकाऊ उपभोग की ओर ले जा सकता है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//aabhushan-bazaar-mein-badlaav-ki-leher-aayat/59827</link><pubDate>5/14/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>निजी सेक्टर ने खोली तिजोरी! खर्च कर डाले 7.7 लाख करोड़, प्राइवेट कैपेक्स में 67% की ग्रोथ</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/road9243891.jpg</Image><description>&lt;p&gt;भारतीय उद्योग परिसंघ (&lt;strong&gt;CII&lt;/strong&gt;) की ताजा रिपोर्ट ने देश की आर्थिक सेहत को लेकर बेहद उत्साहजनक आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 में भारत का&amp;nbsp;&lt;strong&gt;प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;67% बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;7.7 लाख करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 4.6 लाख करोड़ रुपये था। इसे निवेश चक्र (Investment Cycle) में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;सेक्टरवार निवेश का लेखा-जोखा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;CII ने लगभग 1,200 कंपनियों (CMIE Prowess डेटाबेस) का विश्लेषण कर बताया है कि निवेश की यह लहर किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (सबसे बड़ा हिस्सेदार):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कुल निजी निवेश का लगभग आधा हिस्सा (&lt;strong&gt;3.8 लाख करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;) इसी सेक्टर से आया। इसमें मुख्य रूप से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;मेटल, ऑटोमोबाइल और केमिकल&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;क्षेत्रों का दबदबा रहा।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सर्विसेज सेक्टर (40% योगदान):&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;सेवा क्षेत्र ने&amp;nbsp;&lt;strong&gt;3.1 लाख करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;का योगदान दिया। इसे मुख्य रूप से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;आईटी (IT/ITeS), ट्रेड और कम्युनिकेशन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;सेक्टर से मजबूती मिली।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;क्यों बढ़ रहा है निवेश? (मुख्य संकेतक)&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;CII के डायरेक्टर जनरल&amp;nbsp;&lt;strong&gt;चंद्रजीत बनर्जी&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ने निवेश में आए इस निर्णायक मोड़ के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए हैं:&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;कैपेसिटी यूटिलाइजेशन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कंपनियों की उत्पादन क्षमता का उपयोग 74.3% से बढ़कर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;75.6%&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हो गया है, जिसका मतलब है कि मांग बढ़ रही है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नए ऑर्डर्स:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;ऑर्डर बुक में सालाना आधार पर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;10.3%&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बैंक क्रेडिट ग्रोथ:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में बैंक क्रेडिट ग्रोथ&amp;nbsp;&lt;strong&gt;14%&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;रही, जो पहली छमाही (10%) के मुकाबले काफी बेहतर है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;hr /&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;चुनौतियों के बीच CII का '5-सूत्रीय एजेंडा'&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए, CII ने इकोनॉमी की गति बनाए रखने के लिए सरकार को 5 सुझाव दिए हैं:&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ऊर्जा सुरक्षा:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;वैश्विक संकट के बीच ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सप्लाई चेन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करना।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;नीतिगत निरंतरता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों को स्थिर रखना।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;निर्यात प्रोत्साहन:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में भारत की स्थिति मजबूत करना।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;इंफ्रास्ट्रक्चर:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए बुनियादी ढांचे में तेजी लाना।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//neeji-sector-ne-kholi-tijori/59805</link><pubDate>5/11/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>तेल कंपनियों पर बढ़ा भारी दबाव, रोज 1,700 करोड़ रुपये तक का घाटा</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/petrol8815481.jpg</Image><description>&lt;p&gt;वैश्विक ऊर्जा संकट और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय ग्राहकों को राहत देने की बड़ी कीमत देश की सरकारी तेल कंपनियां चुका रही हैं। पिछले 10 हफ्तों के आंकड़ों पर गौर करें तो&amp;nbsp;&lt;strong&gt;इंडियन ऑयल (IOC)&lt;/strong&gt;,&amp;nbsp;&lt;strong&gt;भारत पेट्रोलियम (BPCL)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;और&amp;nbsp;&lt;strong&gt;हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को कुल मिलाकर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;1 लाख करोड़ रुपये&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;रोजाना 1,700 करोड़ रुपये का घाटा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;सरकारी तेल कंपनियां वर्तमान में भारी 'अंडर-रिकवरी' (Under-recovery) का सामना कर रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल जिस महंगी दर पर खरीद रही हैं, उसकी तुलना में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल काफी सस्ते दाम पर बेच रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों का सामूहिक घाटा&amp;nbsp;&lt;strong&gt;1,600 से 1,700 करोड़ रुपये प्रतिदिन&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;तक पहुंच गया है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;कच्चा तेल 50% महंगा, पर दाम स्थिर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग&amp;nbsp;&lt;strong&gt;50% का उछाल&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;आया है। इसके बावजूद, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें करीब दो साल पुराने स्तर पर ही स्थिर हैं।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पेट्रोल:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;~94.77 रुपये प्रति लीटर&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डीजल:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;~87.67 रुपये प्रति लीटर&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;LPG:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;हालांकि मार्च में रसोई गैस के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे, लेकिन यह भी अभी लागत मूल्य से काफी पीछे है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;कर्ज के जाल और प्रोजेक्ट्स पर संकट&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;लगातार होते इस घाटे का असर अब कंपनियों की आर्थिक सेहत पर दिखने लगा है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;वर्किंग कैपिटल:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कच्चा तेल खरीदने और रिफाइनरी चलाने के लिए अब कंपनियों को बाजार से भारी&amp;nbsp;&lt;strong&gt;कर्ज&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;उठाना पड़ सकता है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;प्रोजेक्ट्स में देरी:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो तेल कंपनियों को अपने भविष्य के बड़े प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा में बदलाव करना पड़ सकता है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सरकार की प्राथमिकता:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;घाटे के बावजूद, सरकार एथेनॉल ब्लेंडिंग, बायोफ्यूल और ऊर्जा सुरक्षा जैसे रणनीतिक प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही है ताकि भविष्य में आयात पर निर्भरता कम की जा सके।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;p&gt;अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वैश्विक अस्थिरता के बीच ये कंपनियां कब तक खुद को इस भारी घाटे से बचाकर ग्राहकों को सस्ती ऊर्जा मुहैया करा पाएंगी।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//petol-companies-par-bhaari-dabaav/59801</link><pubDate>5/11/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी की अपील, 1 साल तक गोल्ड नहीं! क्या होगा ज्वेलरी इंडस्ट्री पर असर?</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/modi9227151.jpg</Image><description>&lt;p&gt;पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पीएम मोदी ने देशवासियों से&amp;nbsp;&lt;strong&gt;अगले 1 साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचने&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की भावुक अपील की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत करना और भारत के&amp;nbsp;&lt;strong&gt;चालू खाता घाटे (CAD)&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;को नियंत्रित रखना है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;क्यों जरूरी है यह अपील?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;भारत अपनी सोने की खपत का एक बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है, जिसके भुगतान के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) खर्च करनी पड़ती है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;डॉलर की बचत:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;कच्चा तेल महंगा होने से पहले ही आयात बिल बढ़ चुका है। ऐसे में सोने का आयात कम होने से डॉलर की बचत होगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रुपये को मजबूती:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में रुपये की स्थिति स्थिर बनी रहेगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;CAD पर लगाम:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;आयात और निर्यात के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलेगी।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;ज्वेलरी इंडस्ट्री और शादी सीजन की चिंता&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;पीएम की इस अपील का सबसे गहरा असर&amp;nbsp;&lt;strong&gt;ज्वेलरी इंडस्ट्री&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;पर पड़ने की संभावना है।&lt;/p&gt;

&lt;ol start="1"&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;मांग में गिरावट:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;भारत में शादी-ब्याह और त्योहारों (जैसे दिवाली, अक्षय तृतीया) पर सोना खरीदना परंपरा का हिस्सा है। मांग घटने से सर्राफा कारोबारियों और छोटे सुनारों का व्यापार प्रभावित हो सकता है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
	&lt;li&gt;
	&lt;p&gt;&lt;strong&gt;रिकॉर्ड कीमतें:&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;सोने के दाम पहले ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जिससे खरीदार पहले से ही दूरी बना रहे थे। अब सरकार की अपील के बाद मांग और भी कमजोर पड़ सकती है।&lt;/p&gt;
	&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;अर्थव्यवस्था के लिए 'संजीवनी'&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशवासी इस अपील को मानते हैं, तो यह&amp;nbsp;&lt;strong&gt;'आर्थिक राष्ट्रवाद'&lt;/strong&gt;&amp;nbsp;की दिशा में बड़ा कदम होगा। सोने में निवेश किया जाने वाला पैसा यदि वित्तीय संपत्तियों (जैसे म्यूचुअल फंड या स्टॉक) में जाता है, तो इससे देश के भीतर पूंजी निर्माण (Capital Formation) में मदद मिलेगी।&lt;/p&gt;

&lt;p&gt;पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कुल 10 बड़ी अपीलें की हैं, जिनमें बचत और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//pm-modi-ki-appeal/59800</link><pubDate>5/11/2026 12:00:00 AM</pubDate></item><item><title>शपथ ग्रहण से पहले बंगाल में हलचल, शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड की जांच पहुंची उत्तर प्रदेश, एसआईटी की बड़ी कार्रवाई</title><Image>https://ajmervocals.com//https://manage.localnewscommunity.com/upload/articles/bengal4714661.jpg</Image><description>&lt;p&gt;पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले, राज्य की विशेष जांच टीम (SIT) एक्शन मोड में आ गई है। शुभेंदु अधिकारी के निजी सचिव चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले में कड़ियां जोड़ने के लिए बंगाल पुलिस की एक टीम उत्तर प्रदेश पहुंची है।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;यूपी कनेक्शन और कार की गुत्थी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;एसआईटी की जांच में एक संदिग्ध वाहन की नंबर प्लेट के जरिए उत्तर प्रदेश के तार जुड़े होने का संकेत मिला है। सूत्रों के अनुसार, जिस कार का इस्तेमाल चंद्रनाथ रथ के वाहन को रोकने के लिए किया गया था, उसे हाल ही में एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए डाला गया था। जांच में पता चला है कि उत्तर प्रदेश से कुछ संदिग्धों ने इस विज्ञापन के संबंध में संपर्क किया था। पुलिस अब उन संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि हमलावरों तक पहुंचा जा सके।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;सुपारी किलर्स और संगठित गिरोह का शक&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;पुलिस को अंदेशा है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशेवर 'सुपारी किलर्स' का सहारा लिया गया है। सात सदस्यीय एसआईटी टीम ने उत्तर प्रदेश में सक्रिय विभिन्न गिरोहों और अपराधियों के डोजियर की पड़ताल की है। शुरुआती जांच के अनुसार, इस साजिश में लगभग आठ लोग शामिल हो सकते हैं, जिनमें दो पेशेवर 'शार्प शूटर' होने का संदेह है। अन्य सदस्यों ने संभवतः हत्या के बाद फरार होने और कोलकाता में छिपने के ठिकानों की व्यवस्था की थी।&lt;/p&gt;

&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;6 मई की वो खौफनाक वारदात&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;

&lt;p&gt;उल्लेखनीय है कि 6 मई को उत्तर 24 परगना जिले में अज्ञात हमलावरों ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस हमले में चंद्रनाथ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते नई सरकार के गठन से पहले ही पुलिस प्रशासन पर आरोपियों को पकड़ने का भारी दबाव है।&lt;/p&gt;

&lt;ul&gt;
&lt;/ul&gt;
</description><link>https://ajmervocals.com//bengal-mein-shapath-grahan-se-pehle-shubhendu-adhikari-ke-pa-hatya-kand-ki-janch-up-tak-pahunchi-sit/59781</link><pubDate>5/9/2026 12:00:00 AM</pubDate></item></channel></rss>