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A320 विमान क्यों हो रहे हैं ग्राउंड? आपकी उड़ान पर कितना असर पड़ेगा, पूरी जानकारी

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Posted On:Saturday, November 29, 2025

दुनिया की सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाली एयरबस A320 सीरीज़ के विमानों में एक बड़ी तकनीकी ख़ामी सामने आई है, जिसका सीधा संबंध उड़ान सुरक्षा से है। यह पता चला है कि सोलर रेडिएशन (सूरज से आने वाली तेज़ ऊर्जा) इन विमानों के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम को गंभीर रूप से प्रभावित करने का ख़तरा पैदा कर रहा है। इस सनसनीखेज़ खुलासे के बाद, एयरबस ने दुनिया भर की सभी एयरलाइंस को तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट करने का सख्त आदेश दिया है।

एयरबस ने अपने आदेश में कहा है कि एयरलाइंस को तत्काल सॉफ्टवेयर अपडेट करना होगा, ज़रूरत पड़ने पर हार्डवेयर रिप्लेस करना होगा, और जब तक पूरा अपग्रेड नहीं हो जाता, तब तक अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। एविएशन जगत में इसे एयरबस के 55 साल के इतिहास में सबसे बड़ा रिकॉल ऑपरेशन कहा जा रहा है, जिसका सीधा असर करीब 6000 उड़ानों पर पड़ सकता है।

भारत पर दिखने लगा असर

इस तकनीकी ख़ामी का असर भारत में भी दिखने लगा है, जहाँ A320 सीरीज़ के विमान सबसे ज़्यादा उपयोग किए जाते हैं। इंडिगो (दुनिया की सबसे बड़ी A320 ऑपरेटर), एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों में देरी देखने को मिल रही है।

क्या हुई है एयरबस A320 में गड़बड़ी?

एयरबस A320, दुनिया में सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला सिंगल-आइल विमान है, लेकिन अब इसमें एक गंभीर सुरक्षा समस्या का पता चला है। जाँच में पाया गया है कि तेज़ सोलर रेडिएशन फ्लाइट कंट्रोल डेटा को ख़राब कर सकता है।

यह दिक्कत पहली बार 30 अक्टूबर 2025 को तब नोटिस हुई, जब नेवार्क जा रही एक A320 उड़ान अचानक नीचे की ओर झुकने लगी। शुरुआती जाँच में पता चला कि कंट्रोल स्विच बदलने के दौरान फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर ने ग़लत डेटा पढ़ लिया था। उड़ान को तुरंत टैम्पा एयरपोर्ट पर इमरजेंसी में डायवर्ट करना पड़ा, जिसमें कुछ यात्रियों को चोटें भी आईं।

इस घटना के बाद, एयरबस ने गहन जाँच की और माना कि तेज़ सोलर रेडिएशन, ख़ासकर उड़ान की ऊँचाई, दिशा और स्थिरता से जुड़े फ्लाइट कंट्रोल डेटा को डिस्टर्ब कर सकता है।

सोलर रेडिएशन कैसे बिगाड़ता है उड़ानें?

सूर्य कभी-कभी अंतरिक्ष में तेज़ी से प्लाज्मा और चार्ज्ड पार्टिकल्स फेंकता है, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहते हैं। ये कण जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो 28,000 फीट तक की ऊँचाई पर मौजूद सैटेलाइट सिस्टम, नेविगेशन और फ्लाइट कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स को प्रभावित कर सकते हैं।

इस तरह के मामले पहले भी सामने आए हैं। 2003 में, LANew York रूट की उड़ानों में इसी तरह की नेविगेशन दिक्कतें आई थीं।

🇮🇳 भारत में स्थिति और यात्रियों पर प्रभाव

भारत में इंडिगो, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस के पास बड़ी संख्या में A320 विमान हैं। PTI के अनुसार, फ़िलहाल कोई उड़ान रद्द नहीं हुई है, लेकिन कई उड़ानों में 60 से 90 मिनट तक की देरी देखी जा रही है।

  • इंडिगो ने बयान जारी कर कहा है कि वे सभी सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन कर रहे हैं। सावधानी वाले अपडेट जारी हैं, जिससे शेड्यूल में हल्का बदलाव संभव है।

  • एअर इंडिया ने आश्वासन दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनके 40% विमानों में अपग्रेड हो चुका है, लेकिन देरी अभी भी संभव है।

आने वाले 23 दिनों में यह तकनीकी समस्या यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।


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